पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है। चुनाव नजदीक आते ही राज्य में प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिससे सियासी हलचल और तेज हो गई है। इसी बीच भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि विपक्षी नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जिससे निष्पक्ष चुनाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शुभेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि सिर्फ फोन कॉल ही नहीं, बल्कि नेताओं की लोकेशन तक ट्रैक की जा रही है। उनके अनुसार यह काम सुरक्षा एजेंसियों के जरिए किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए कहा कि अगर ऐसा जारी रहा, तो चुनाव की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी नेताओं पर दबाव बनाने के आरोप और प्रशासन पर सवाल
भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और उम्मीदवारों पर जानबूझकर केस दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सब चुनाव से पहले विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, उनकी पार्टी के एक उम्मीदवार को सीआईडी की तरफ से नोटिस भी भेजा गया है, जिससे कार्यकर्ताओं में चिंता का माहौल बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात को देखकर ऐसा नहीं लगता। उन्होंने सुरक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी सवाल उठाए और कहा कि उनका व्यवहार पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रहा है। इस तरह के आरोपों ने राज्य की राजनीति को और गर्म कर दिया है और सभी की नजर अब चुनावी तैयारियों पर टिकी हुई है।
नामांकन की तैयारी और चुनावी मुकाबले में तेजी
शुभेंदु अधिकारी ने यह भी जानकारी दी कि वह 2 अप्रैल को नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन दाखिल करेंगे। यह सीट पहले भी काफी चर्चाओं में रही है और इस बार भी यहां मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि भाजपा के बड़े नेता राज्य में चुनाव प्रचार के लिए आ सकते हैं, जिससे पार्टी को मजबूती मिल सकती है।
राज्य में चल रही इन सभी गतिविधियों के बीच यह साफ है कि आने वाले चुनाव काफी महत्वपूर्ण होने वाले हैं। एक तरफ जहां सत्ताधारी दल अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा है, वहीं विपक्ष भी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, बंगाल की राजनीति में बढ़ती हलचल यह संकेत दे रही है कि चुनाव से पहले और भी कई बड़े मुद्दे सामने आ सकते हैं। अब देखना यह होगा कि इन आरोपों का क्या असर पड़ता है और चुनावी नतीजों पर इसका कितना प्रभाव दिखाई देता है।
