Fact Check: अकादमी में छात्र को पीटने का वीडियो वायरल, सांप्रदायिक दावा निकला गलत – पढ़ें पूरी सच्चाई

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इस वीडियो में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को चप्पल से मारता हुआ दिखाई देता है। कुछ लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए इसे दिल्ली के एक सरकारी दफ्तर की घटना बता रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि एक मुस्लिम महिला रोजा रखकर काम कर रही थी और उसी दौरान एक हिंदू कर्मचारी ने उसे पीट दिया।

हालांकि, जब इस पूरे मामले की जांच की गई तो सच्चाई कुछ और ही सामने आई। यह वीडियो न तो किसी सरकारी दफ्तर का है और न ही इसमें कोई सांप्रदायिक एंगल पाया गया है।

क्या है वायरल दावा और लोग क्या कह रहे हैं

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को अलग-अलग कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है। कई यूजर्स का कहना है कि यह घटना दिल्ली के एक ऑफिस की है, जहां एक महिला रोजा रखकर काम कर रही थी और उसी दौरान उसके साथ मारपीट की गई।

कुछ पोस्ट में इसे महिलाओं की सुरक्षा और धार्मिक भेदभाव से जोड़कर दिखाया जा रहा है। इससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन गई और कई लोग बिना सच्चाई जाने इसे सच मानने लगे।

लेकिन इस तरह के संवेदनशील मामलों में बिना जांच के किसी भी जानकारी को सच मान लेना गलत हो सकता है। इसलिए इस वीडियो की सच्चाई जानना बेहद जरूरी था।

पड़ताल में सामने आई सच्चाई, नहीं मिला कोई सांप्रदायिक एंगल

इस वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए इसकी गहराई से जांच की गई। वीडियो के कुछ हिस्सों (कीफ्रेम्स) को लेकर गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया गया।

जांच के दौरान यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर मिला, जिसका नाम “कमांडो एकेडमी लाइफ” है। इस चैनल पर यह वीडियो जनवरी 2026 में अपलोड किया गया था।

वीडियो के साथ दिए गए कैप्शन से साफ पता चलता है कि यह किसी छात्र से जुड़ी घटना है, न कि किसी महिला कर्मचारी से। जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति विराट चौधरी नाम का है, जो एक ट्रेनिंग अकादमी चलाते हैं।

अकादमी में युवाओं को सेना और अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। वीडियो में जो घटना दिखाई दे रही है, वह इसी अकादमी से जुड़ी हुई है।

इसके अलावा, वीडियो का एक और हिस्सा भी मिला जिसमें बताया गया है कि संबंधित छात्र अकादमी के नियमों का पालन नहीं कर रहा था। इसी वजह से उसे सजा दी गई थी।

इस पूरी जांच में कहीं भी यह बात सामने नहीं आई कि यह घटना किसी सरकारी दफ्तर की है या इसमें किसी धर्म से जुड़ा मामला है।

निष्कर्ष: वायरल दावा पूरी तरह भ्रामक

जांच के आधार पर यह साफ हो गया है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है।

यह वीडियो किसी सरकारी दफ्तर का नहीं है और न ही इसमें किसी महिला को पीटा जा रहा है। यह एक ट्रेनिंग अकादमी का मामला है, जहां अनुशासन के तहत एक छात्र को सजा दी गई थी।

साथ ही, इसमें किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक एंगल नहीं पाया गया है।

ऐसे मामलों में लोगों को चाहिए कि वे किसी भी वीडियो या खबर को बिना जांच के शेयर न करें। गलत जानकारी फैलाने से समाज में भ्रम और तनाव पैदा हो सकता है।

इसलिए हमेशा किसी भी वायरल खबर पर भरोसा करने से पहले उसकी सच्चाई जरूर जांच लें।

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