Pithoragarh News: पर्यावरण बटालियन शिफ्ट करने के विरोध में पूर्व सैनिकों का धरना जारी
पिथौरागढ़ जिले में इन दिनों एक मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। Pithoragarh News के अनुसार, पर्यावरण बटालियन को दूसरी जगह शिफ्ट करने के फैसले के खिलाफ पूर्व सैनिकों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। यह धरना अब 47वें दिन में प्रवेश कर चुका है, जो इस बात का संकेत देता है कि यह मामला लोगों के लिए कितना महत्वपूर्ण बन चुका है।
पूर्व सैनिकों का बढ़ता आक्रोश
पिथौरागढ़ में पूर्व सैनिकों ने कलक्ट्रेट के बाहर धरना देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि पर्यावरण बटालियन विरोध सिर्फ एक प्रशासनिक निर्णय का मामला नहीं है, बल्कि यह उनके रोजगार और जीवन से जुड़ा हुआ है।
धरने में शामिल पूर्व सैनिकों ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उनका मानना है कि इस बटालियन के कारण उन्हें रोजगार मिला है और इससे क्षेत्र में पलायन भी काफी हद तक रुका है।

धरने में शामिल कई पूर्व सैनिकों ने बताया कि अगर यह बटालियन यहां से हटा दी जाती है, तो स्थानीय लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। खासकर उन परिवारों को जो इस पर निर्भर हैं।
रोजगार और पलायन पर असर
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और पलायन का है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि जब से पर्यावरण बटालियन शुरू हुई है, तब से इलाके में रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
Pithoragarh News में यह भी सामने आया है कि इस बटालियन ने न सिर्फ लोगों को रोजगार दिया, बल्कि युवाओं को अपने गांव में ही रहने का मौका भी दिया। इससे बाहर शहरों की ओर पलायन कम हुआ है।
लेकिन अब अगर इसे शिफ्ट किया जाता है, तो यह स्थिति फिर से खराब हो सकती है। लोग मजबूर होकर रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन कर सकते हैं।
पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए।
समाधान की मांग और आगे की रणनीति
धरने के दौरान पूर्व सैनिकों ने एक सुझाव भी दिया है। उनका कहना है कि अगर अरावली क्षेत्र को बचाना है, तो वहां नई बटालियन बनाई जानी चाहिए, लेकिन पिथौरागढ़ की बटालियन को हटाना सही नहीं है।
पर्यावरण बटालियन विरोध के इस मुद्दे को लेकर पूर्व सैनिक अब और ज्यादा संगठित हो गए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
धरने में मेजर दिनेश धामी, जीवन बोहरा, कृष्णा नेगी, विक्रम सिंह, नारायण पाटनी, उमेश फुलेरा और गोपाल बोहरा सहित कई पूर्व सैनिक शामिल रहे। इन सभी ने एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई है।
यह मामला अब सिर्फ एक स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा हुआ बन गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस पर क्या फैसला लेता है और क्या पूर्व सैनिकों की मांगों को माना जाता है या नहीं।
इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि जब लोगों के रोजगार और भविष्य की बात आती है, तो वे अपने हक के लिए लंबे समय तक संघर्ष करने के लिए तैयार रहते हैं। Pithoragarh News में यह मुद्दा अब एक बड़ी खबर बन चुका है और आने वाले दिनों में इसमें और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।




