CBSE Advisory On QR Code: क्या सच में प्रश्नपत्र के QR कोड खोलते हैं कोई लिंक? बोर्ड ने दी बड़ी सफाई
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें परीक्षा के प्रश्नपत्रों पर छपे QR कोड को लेकर फैल रही अफवाहों पर पूरी तरह से रोक लगाने की कोशिश की गई है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा था कि इन QR कोड्स को स्कैन करने पर कुछ अजीब और असंबंधित कंटेंट दिखाई देता है। इसने छात्रों और अभिभावकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी थी।
QR कोड को लेकर फैली अफवाहों की सच्चाई
CBSE ने साफ शब्दों में कहा है कि प्रश्नपत्रों पर दिए गए QR कोड किसी भी प्रकार के वेब लिंक नहीं होते हैं। ये कोड केवल बोर्ड के आंतरिक सिस्टम का हिस्सा होते हैं, जिनका उद्देश्य परीक्षा की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखना होता है।
बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि जब इन QR कोड्स को स्कैन किया जाता है, तो कोई वेबसाइट नहीं खुलती, बल्कि केवल एक टेक्स्ट दिखाई देता है। इस टेक्स्ट का उपयोग केवल आंतरिक ट्रैकिंग के लिए किया जाता है।
लेकिन जब कुछ लोग इस टेक्स्ट को गूगल पर सर्च करते हैं, तो उन्हें अलग-अलग प्रकार के परिणाम देखने को मिलते हैं, जो पूरी तरह से गूगल के एल्गोरिदम पर आधारित होते हैं। यही कारण है कि लोगों को गलतफहमी हो रही है कि QR कोड किसी बाहरी कंटेंट से जुड़ा हुआ है।
परीक्षा के दौरान सामने आए चौंकाने वाले मामले
हाल ही में हुई कुछ परीक्षाओं के दौरान छात्रों ने दावा किया कि QR कोड स्कैन करने पर अजीब तरह के सर्च रिजल्ट सामने आए।
30 मार्च को आयोजित कक्षा 12 की इतिहास परीक्षा के दौरान कुछ छात्रों ने बताया कि QR कोड से जुड़े सर्च रिजल्ट में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर “ओरी” का नाम दिखाई दे रहा था।
इसी तरह 9 मार्च को गणित परीक्षा में कुछ छात्रों को QR कोड स्कैन करने के बाद एक मजाकिया “रिकरोल” वीडियो से जुड़ा कंटेंट दिखा, जो इंटरनेट पर पहले से वायरल है।
इन घटनाओं के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें फैलने लगीं, जिससे छात्रों में भ्रम और डर पैदा हो गया।
बोर्ड की अपील: अफवाहों से रहें दूर
CBSE ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। बोर्ड ने कहा कि QR कोड का किसी भी व्यक्ति, वीडियो या वेबसाइट से कोई सीधा संबंध नहीं है।
बोर्ड के अनुसार, कुछ लोग जानबूझकर इन सर्च रिजल्ट्स को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं, जिससे अफवाहें फैल रही हैं।
CBSE ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी जानकारी पर भरोसा न करें जो आधिकारिक स्रोत से न आई हो। केवल बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट और नोटिस पर ही विश्वास करें।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि आज के डिजिटल युग में किसी भी जानकारी को बिना जांचे-परखे मान लेना खतरनाक हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि छात्र और अभिभावक सतर्क रहें और सही जानकारी पर ही भरोसा करें।



