ऋषिकेश में स्थित श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय से जुड़े पीएलएमएस परिसर में परीक्षा परिणाम में हो रही गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार सुबह बड़ी संख्या में छात्र, छात्रसंघ पदाधिकारी और एनएसयूआई कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन के मुख्य गेट पर एकत्रित हुए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने गेट पर तालाबंदी कर दी, जिससे परिसर में करीब पांच घंटे तक कामकाज पूरी तरह ठप रहा।
प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई महानगर अध्यक्ष हिमांशु जाटव कर रहे थे। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पूरी तरह से खराब हो चुकी है। कई छात्रों को परीक्षा देने के बावजूद अनुपस्थित दिखा दिया गया है, जबकि कुछ की उत्तर पुस्तिकाओं का सही मूल्यांकन नहीं हुआ है। छात्रों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
परीक्षा परिणाम में देरी और गलतियों से बढ़ी परेशानी
छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय समय पर परीक्षा परिणाम घोषित नहीं कर पा रहा है। बीबीए और बीसीए जैसे कोर्स की परीक्षाएं नवंबर और दिसंबर में आयोजित की गई थीं, लेकिन अब तक उनके परिणाम जारी नहीं किए गए हैं। इससे छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
छात्रसंघ सचिव अभिषेक कुमार त्रिसूलिया ने कहा कि परिणाम में देरी के कारण कई छात्र जरूरी अवसरों से वंचित हो रहे हैं। वहीं, स्क्रूटनी (पुनः जांच) के लिए प्रति विषय तीन हजार रुपये का शुल्क लिया जा रहा है, जो आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बहुत ज्यादा है। छात्रों की मांग है कि इस शुल्क को घटाकर एक हजार रुपये किया जाए।
इसके अलावा छात्रों ने यह भी मांग की कि सहायक परीक्षा नियंत्रक को पहले की तरह सप्ताह में दो दिन परिसर में बैठना चाहिए, ताकि समस्याओं का समाधान जल्दी हो सके। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
पुलिस के हस्तक्षेप से बढ़ा तनाव, कुछ छात्रों को ले जाया गया थाने
प्रदर्शन के दौरान जब स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई, तो प्रशासन ने पुलिस को बुलाया। पुलिस के पहुंचते ही माहौल और गर्म हो गया। पुलिस ने छात्रों को गेट से हटाने की कोशिश की, जिससे छात्रों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। कई छात्रों को जबरन उठाकर परिसर से बाहर किया गया और कुछ को थाने भी ले जाया गया।
एनएसयूआई नेताओं का कहना है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया, जो छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है। हिमांशु जाटव ने कहा कि पुलिस कार्रवाई से छात्रों का आक्रोश और बढ़ गया।
पुलिस कुछ छात्र नेताओं को करीब दो घंटे के लिए थाने ले गई, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद भी छात्रों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है और उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही परीक्षा परिणाम में सुधार नहीं किया गया और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस समस्या का समाधान कब तक करता है।


