चंबा में कार धोखाधड़ी मामला: फर्जी दस्तावेजों से वाहन बेचने का आरोप, पुलिस जांच शुरू

हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले से एक चौंकाने वाला धोखाधड़ी का मामला सामने आया है, जहां एक फाइनांस कंपनी के मैनेजर समेत दो लोगों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर कार बेचने का आरोप लगा है। इस मामले में पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच शुरू कर दी गई है।

पीड़ित विकास सिंह, जो कोटुई डाकघर पुखरी के निवासी हैं, ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने नवंबर 2024 में अपनी ऑल्टो K-10 कार को बेचने के लिए दिनेश कुमार को दिया था। दिनेश कुमार कारों की खरीद-बिक्री का काम करता है और उसने कार के बदले तीन लाख रुपये देने का वादा किया था।

कुछ समय बाद आरोपी ने गूगल पे के माध्यम से सिर्फ 10 हजार रुपये का भुगतान किया और बाकी रकम देने के लिए बार-बार टालमटोल करता रहा। जब पीड़ित ने बार-बार पैसे या कार वापस मांगी, तो आरोपी ने साफ इनकार कर दिया। इससे पीड़ित को शक हुआ और उन्होंने अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू की।

फर्जी दस्तावेज बनाकर कार ट्रांसफर करने का आरोप

जांच के दौरान पीड़ित को पता चला कि दिनेश कुमार ने फाइनांस कंपनी के मैनेजर दीपक कुमार के साथ मिलकर पूरी साजिश रची थी। आरोप है कि दोनों ने बिना अनुमति के कार को फाइनेंस करवा लिया और उसके दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया।

पीड़ित ने बताया कि उन्होंने कार के सभी जरूरी कागजात सही तरीके से तैयार करने और शपथपत्र बनाने की बात कही थी, लेकिन आरोपियों ने इसका गलत फायदा उठाया। उन्होंने 9 जनवरी 2025 को फर्जी फॉर्म 29 और 30 तैयार किए, जो वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण के लिए उपयोग किए जाते हैं।

इतना ही नहीं, इन दस्तावेजों को चंबा के नोटरी से सत्यापित भी करवाया गया, जिससे यह पूरी प्रक्रिया कानूनी दिखे। बाद में 9 मार्च 2025 को कार की एनओसी भी हासिल कर ली गई और वाहन को मैनेजर के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।

पुलिस जांच शुरू, सख्त कार्रवाई की तैयारी

इस पूरे मामले में पीड़ित ने आरोप लगाया है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर साजिश के तहत उनकी कार के दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किया और उसे अपने नाम कर लिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में फाइनांस कंपनी की भी मिलीभगत हो सकती है, जिसकी जांच जरूरी है।

पुलिस अधीक्षक चंबा, विजय सकलानी ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस धोखाधड़ी में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

यह मामला आम लोगों के लिए एक चेतावनी भी है कि वाहन खरीद-बिक्री के समय सभी दस्तावेजों की अच्छी तरह जांच करें और किसी पर भी आंख बंद करके भरोसा न करें। सही प्रक्रिया और सावधानी से ही इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

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