क्या शीतल देवी हार गईं? पायल नाग ने कर दिखाया बड़ा उलटफेर

पायल नाग ने जीता स्वर्ण पदक, शीतल देवी को हराकर रचा इतिहास

भारत की युवा पैरा तीरंदाज पायल नाग ने हाल ही में हुए पैरा तीरंदाजी सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बैंकॉक में आयोजित इस प्रतियोगिता के महिला कम्पाउंड वर्ग के फाइनल में पायल नाग ने विश्व चैंपियन शीतल देवी को हराकर पायल नाग स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।

यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं है, बल्कि भारतीय पैरा तीरंदाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि भी है। 18 साल की पायल नाग ने जिस आत्मविश्वास और धैर्य के साथ यह मुकाबला जीता, वह काबिल-ए-तारीफ है।

फाइनल मुकाबले में पायल और शीतल देवी आमने-सामने थीं, जिससे मुकाबला और भी रोमांचक हो गया था। पायल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 139-136 के अंतर से जीत दर्ज की। यह उनके करियर का पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक है, जो इस जीत को और भी खास बनाता है।

शीतल देवी, जो पहले से ही विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं, इस मुकाबले में मजबूत दावेदार मानी जा रही थीं। लेकिन पायल नाग ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया कि वह किसी से कम नहीं हैं।

क्वालिफाइंग से फाइनल तक का सफर

इस पैरा तीरंदाजी सीरीज में दोनों खिलाड़ियों का सफर काफी शानदार रहा। क्वालिफाइंग राउंड में शीतल देवी ने 698 (25X) का शानदार स्कोर बनाकर पहला स्थान हासिल किया था। उनका प्रदर्शन इतना बेहतरीन था कि उन्होंने दूसरे स्थान पर रहने वाली खिलाड़ी से 20 अंक ज्यादा हासिल किए थे।

वहीं, पायल नाग ने 678 (9X) का स्कोर बनाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया। हालांकि, शुरुआत में वह तीसरे स्थान पर थीं, लेकिन उनका आत्मविश्वास और खेल के प्रति समर्पण साफ दिखाई दे रहा था।

नॉकआउट राउंड में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। शीतल देवी ने सेमीफाइनल में सिंगापुर की नूर शाहिदा अलीम को 147-142 से हराया। वहीं, पायल नाग ने कजाखस्तान की जनात ऐतिमोवा को 144-140 से हराकर फाइनल में अपनी जगह बनाई।

फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक था। दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। लेकिन दबाव के इस मुकाबले में पायल नाग ने बेहतरीन संयम दिखाया और पायल नाग स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने विश्व चैंपियन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है।

भारत का शानदार प्रदर्शन और भविष्य की उम्मीदें

इस पैरा तीरंदाजी सीरीज में भारत का प्रदर्शन सिर्फ महिला वर्ग तक सीमित नहीं रहा। पुरुष कम्पाउंड व्यक्तिगत वर्ग में श्याम सुंदर स्वामी ने भी शानदार खेल दिखाते हुए कांस्य पदक जीता। उन्होंने हमवतन राकेश कुमार को शूटऑफ में हराया।

दोनों खिलाड़ियों ने 143-143 का समान स्कोर किया, लेकिन टाईब्रेकर में स्वामी ने 10 अंक हासिल कर बाजी मार ली, जबकि राकेश कुमार 9 अंक ही बना सके।

वहीं, महिला W1 वर्ग में अंजुम तंवर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, हालांकि वह कांस्य पदक मुकाबले में हारकर चौथे स्थान पर रहीं।

पायल नाग की इस जीत ने यह साबित कर दिया है कि भारत में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अगर सही मार्गदर्शन और अवसर मिले, तो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकते हैं।

पायल नाग का यह स्वर्ण पदक आने वाले समय में अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा। उनकी मेहनत, आत्मविश्वास और संघर्ष की कहानी युवाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

आने वाले समय में यह उम्मीद की जा रही है कि पायल नाग और अन्य भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में और भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे और देश को कई और पदक दिलाएंगे।

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