महाराष्ट्र में बढ़ा विवाद: अशोक खरात कॉल रिकॉर्ड मामले ने बढ़ाई सियासी हलचल

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। यह मामला दुष्कर्म के आरोपी और स्वयंभू बाबा अशोक खरात से जुड़ा हुआ है। हाल ही में उनके कथित कॉल रिकॉर्ड को लेकर कई बड़े आरोप लगाए गए हैं, जिसके बाद राजनीति गरमा गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने दावा किया है कि उनके पास ऐसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) हैं, जिनमें कई बड़े नेताओं और अशोक खरात के बीच बातचीत का जिक्र है। उन्होंने कहा कि ये जानकारी उन्हें व्हाट्सऐप के जरिए मिली है। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर एक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति के साथ इतने संपर्क क्यों थे।

हालांकि, इस मामले में अभी तक आधिकारिक रूप से कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आरोपों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है।

शिंदे समेत कई नेताओं के नाम आने से बढ़ी बहस

अंजलि दमानिया के अनुसार, कॉल रिकॉर्ड में यह दावा किया गया है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अशोक खरात के बीच करीब 17 बार फोन पर बातचीत हुई। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इन कॉल्स में से एक बातचीत करीब 21 मिनट तक चली थी।

इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और एनसीपी के कुछ अन्य नेताओं के नाम भी इस मामले में सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल और एनसीपी नेता सुनील तटकरे के साथ भी कई बार फोन पर बातचीत हुई। वहीं, भाजपा के एक अन्य नेता आशीष शेलार के साथ भी संपर्क का जिक्र किया गया है।

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा एनसीपी नेता रूपाली चाकणकर को लेकर हो रही है। दावा किया गया है कि उनके और अशोक खरात के बीच सबसे ज्यादा, यानी करीब 177 कॉल हुए थे। इस आरोप के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उन्हें खरात के खिलाफ लगे आरोपों की जानकारी नहीं थी।

इन सभी दावों के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है और लोग सच्चाई जानने की मांग कर रहे हैं।

सरकार का जवाब और आरोपी पर लगे गंभीर आरोप

इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। कई नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि किसी से फोन पर बात करना या मिलना अपने आप में कोई अपराध नहीं होता। उनका कहना है कि जब तक किसी की सीधी संलिप्तता साबित नहीं होती, तब तक ऐसे आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए।

वहीं, शिवसेना की ओर से यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

अगर आरोपी अशोक खरात की बात करें, तो उस पर कई गंभीर आरोप लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि वह महिलाओं को झांसा देकर अपने पास बुलाता था और उनके साथ गलत व्यवहार करता था। उसके खिलाफ यौन शोषण के मामले दर्ज हैं और काला जादू कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अशोक खरात को मार्च महीने में गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ अब तक कई एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके साथ तीन साल तक दुष्कर्म किया गया।

अंजलि दमानिया ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मामले से जुड़े कॉल रिकॉर्ड की कॉपी मुख्यमंत्री, पुलिस अधिकारियों और जांच एजेंसियों को भेज दी है। अब यह मामला जांच के दायरे में है और आने वाले समय में इससे जुड़े और भी खुलासे हो सकते हैं।

फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है, और सभी की नजर इस बात पर है कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है।

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